बाल्मीकि समाज आदर्श हिन्दू
*#Real_Hindu_History*
अकबर के हरम में पाँच हजार सुन्दर हिन्दू युवतियाँ उसकी यौन पिपासा को शांत करने हेतु बंधक बनाई गयीं थी... यह महिलायें और युवतियाँ बाहर शौच हेतु भी न जा सकें इसलिए उनके मल-मूत्र की सफाई हेतु बाल्मीकि समाज को बड़े पैमाने पर स्वैच्छिक कार्य हेतु नौकरी पर रखने की शुरूआत सबसे पहले अकबर ने ही की थी... आप भारत में बने अत्यंत प्राचीन किले एवं हवेलियाँ देखिये, वहां कहीं भी आपको शौचालय नहीं मिलेगा... क्योंकि उन दिनों शौच के लिए बाहर जाना एक प्रथा और परंपरा थी...
उन गौरवशाली बाल्मीकियों को अपने ही हिन्दू समाज की महिलाओं द्वारा इस "महत्तर" (Greatest) कार्य को करने हेतु "महत्तर" कहा गया, तभी से यह लोकप्रचलित नाम "Me-हतर" अस्तित्व में आया। इन महान वाल्मीकियों ने गर्हित कार्य करना स्वीकार किया, किंतु तलवार से घबराकर धर्म परिवर्तन न किया... अकबर जैसों यही चाहता था कि जबरन मुस्लिम बनाए गए उसके "दीनईमान बन्धु" शौच की सफाई न करें, अपितु यह काम हिन्दुओं से ही कराया जाए... इसलिए उसने तीन विकल्प रखे थे - १) या तो हिन्दू बने रहो, और शौच उठाओ... २) या फिर इस्लाम स्वीकार कर लो... ३) या फिर मरने के लिए तैयार हो जाओ... इसके बाद ही घर के अन्दर शौच जाने की शुरुआत हुई...
मुगलई काल में स्वेच्छा से मुसलमान बनने वाले लोगों को राजकीय पद और अनुग्रह में बहुत सी प्रलोभन राशि दी जाती थी। ऐसे समय में वीर वाल्मीकियों ने जनेऊ की शुचिता का पालन न कर पाने के कारण, स्वयं अपने हाथों से अपना यज्ञोपवीत सूत्र “भंग” कर तोड़ डाला और “Bhan-गी” नाम स्वीकार किया, किंतु अपने गौरवशाली सनातन धर्म को नहीं छोड़ा। प्राणभय द्वारा डराकर, मार-मार कर, प्रलोभन देकर, स्त्रियों को अपहरण करके जैसे-जैसे और जिस-जिस तरीके से यह बढ़ सकता था, हर प्रकार से इसे राजनीतिक संरक्षण में लेकर इस्लाम को बढ़ाया गया... परन्तु वराहदेव के अनुयायी वाल्मीकि झुके नहीं...