भारत का गौरवशाली इतिहास 131 आदि कवि वाल्मीकि जी

आप सभी को " समरसता पर्व *भगवान वाल्मीकि* जी के प्रकटोतस्व की हार्द्विक बधाई । 

महर्षि वाल्मीकि संस्कृत भाषा के आदि कवि और आदि काव्य *श्री रामायण* के रचियता के रुप में प्रसिद्द हैं । महर्षि कश्यप और अदिति के नवम पुत्र वरुण से इनका जन्म हुआ । परम ज्ञाण प्राप्त होते ही यह श्लोक इनके मुख से निकला *मा निषाद प्रतिष्ठाम त्मगम: शाश्र्वती समा । यत्क्रौंचमिथुना कमवधी: काम मोहितम* ॥ संसार को प्रभु श्रीराम की लीला का ग्रंथ के रुप में प्रसार कर राम नाम से जोड़ा। *भगवान श्रीराम जी के जीवन को जन - जन तक रामकथा के रूप में पहुँचाने का श्रेय भी भगवान वाल्मीकि जी को है* ।

नर में नारायण के दर्शन , एकात्मकता , निडरता , प्रभु भक्ति मानव के जीवन में लाने के लिए सदैव प्रयासरत रहे । *माता सीता जी को कष्ट के समय सहारा व लव - कुश को जिस तरह हर विद्या में निपुण किया यह सब भगवान वाल्मीकि जी के आशीर्वाद से ही संभव हो सका* । 

मानव के जीवन में हरि का नाम ही सर्वोपरी है यह बात संसार को समझा एक समरसता पूर्ण समाज को गठित करने में अपना अद्भुत योगदान दिया । *आएँ आज हम सब मिलकर उनके प्रकटोतस्व पर यह संकल्प लें कि उनके दिखाए मार्ग व समाज को समरस करने में अपना योगदान अवश्य डालेंगे* । *जय भगवान वाल्मीकि जी की*

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