भारत का गौरवशाली इतिहास - 82- हमें अपने परिवार में धार्मिक ग्रन्थों को क्यों पढ़ना चाहिए ? --
भारत का गौरवशाली इतिहास - 81- हमें अपने परिवार में धार्मिक ग्रन्थों को क्यों पढ़ना चाहिए ? --
औरंगजेब का बड़ा भाई दाराशिकोह उपनिषदों से इतना प्रभावित हुआ कि उसने उपनिषदों को पढने के लिए संस्कृत का अध्ययन किया और उपनिषदों का फ़ारसी में अनुवाद किया|
एक मुसलमान होते हुए और कुरान शरीफ़ को ईश्वरीय पुस्तक स्वीकार करते हुए दारा शिकोह ने उपनिषदों के विषय में बहुत ही उदार विचार प्रकट करते हुए उपनिषदों को समस्त ईश्वरीय पुस्तकों में प्राचीनतम बता दिया| इन्हीं विचारों के कारण औरंगजेब ने अपने बड़े भाई पर कुफ्र का फतवा लगाकर क़त्ल करवा दिया|
औरंगजेब की पुत्री जेबुन्निसा ने अपने चाचा दाराशिकोह से उपनिषदों के रहस्यों को जाना| उस पर भी उपनिषदों का रंग चढ़ गया ।जेबुन्निसा के पास चीनी शीशा था, बहुत ही सुंदर, जिसे एक व्यापारी औरंगजेब को उपहार देकर गया था| एक दिन जेबुन्निसा छत पर बैठी हुई अपने बाल सुखा रही थी तो उसे अपने उस शीशे की याद आई, उसने अपनी दासी को शीशा लाने की आज्ञा दी| दासी शीशा उठाकर चली पर थोड़ी दूर जाने पर ही शीशा उसके हाथ से गिरकर टूट गया|
दासी के पैरों तले जमीन खिसक गई, चेहरा पीला पड़ गया और ह्रदय धक-धक करने लगा| भयभीत होकर वहीं खड़ी रही| जब काफ़ी देर हो गई तो जेबुन्निसा ने आवाज दी| डरी और सहमी हुई दासी उसके समक्ष जाकर कांपती हुई वाणी में बोली- “हे शहजादी! मेरे दुर्भाग्य से वह शीशा गिरकर टुकड़े-टुकड़े हो गया”।
यह सुनकर जेबुन्निसा को क्रोध नहीं आया, वह मुस्कुराकर बोली- *“चलो, अच्छा हुआ वह विलासिता का सामान समाप्त हो गया| प्रतिदिन उसे देखने से अभिमान होता था| अब न उसे देखूंगी, न ही अभिमान होगा” ।*
---- *यह है धार्मिक ग्रन्थों के अध्ययन का जादू..*