भारत का गौरवशाली इतिहास -66 - राष्ट्रीय नायक सद्गुरु राम सिंह कूका --

भारत का गौरवशाली इतिहास -66 - राष्ट्रीय नायक सद्गुरु राम सिंह कूका -- 
           सद्गुरु राम सिंह कूका एक सैनिक, धार्मिक नेता और भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में एक प्रमुख योद्धा थे. वे कूका आंदोलन के संस्थापक थे. अंग्रेजों के साथ उनकी असहयोग की नीति, मुख्यतः पंजाब में जनता के बीच बेहद लोकप्रिय थी.
          आपका जन्म वर्ष 1816 में पंजाब के लुधियाना जिले के भैणी गाँव में हुआ था. वे सिख सेना में सैनिक के रूप में शामिल हुए और वहाँ पर वे भाई बालक सिंह से मिलकर काफी प्रभावित हुए. भाई बालक सिंह की मृत्यु के बाद, आपने धर्म-प्रचार कार्यों की जिम्मेदारियों को संभाला. आपने  सिक्ख समाज मे जाति व्यवस्था के खिलाफ लड़ाई लड़ी और उन्हें अंतरजातीय विवाह और विधवा पुनर्विवाह के लिए लोगों को प्रोत्साहित किया .
          आपने ब्रिटिश शासन का पूर्ण रूप से विरोध किया और उनके खिलाफ गहन असहयोग आंदोलन की शुरुआत की. आपके नेतृत्व में लोगों ने अंग्रेजी शिक्षा, मिलों में बने कपड़े और बाहर से आए अन्य आयातित सामानों का भी बहिष्कार किया. कुका या नामधारी आंदोलन ने समय के साथ अपनी गति बढ़ा दी थी और ब्रिटिशर्स द्वारा कई कुका स्वतंत्रता सेनानियों को हिंसक रूप से मारने का विरोध किया था. आप को बंदी बनाकर रंगून भेज दिया गया और उसके बाद उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाकर अंडमान जेल भेज दिया गया.
         29 नवंबर 1885 में आप का निधन हो गया था. आपकी मृत्यु के बाद असहयोग और सविनय अवज्ञा की प्रणाली को बाद में महात्मा गांधी ने अपनाया.सद्गुरु राम सिंह कूका का उनके अनुयायियों पर इतना गहरा प्रभाव पड़ा था कि उनकी मृत्यु के बाद भी उनके अनुयायियों ने विश्वास नहीं किया कि वह वास्तव में मर चुके हैं. उनको लगता था कि लोगों का मार्ग दर्शन करने के लिए वह वापस लौट आएंगे. 
*आज सद्गुरु राम सिंह कूका की पुण्यतिथि पर शत शत नमन।*

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