आँवला नवमी
आज आँवला नवमी है ।
मुझे याद है गाँवों में इस दिन घर के अंदर भोजन नहीं बनता था । आँवला के पेड़ के नीचे सुबह सुबह साफ सफाई होने लगती थी । आँवला नवमी से एक दिन पहले ही उस स्थान की गाय के गोबर से लिपाई पुताई हो जाती थी ।
आँवला नवमी के दिन खानदान की सभी स्त्रियाँ इकट्ठी होकर मिट्टी के चूल्हे पर एक साथ पूरे खानदान का भोजन बनाती थी । पुरुष ईंधन और बाल्टी बाल्टी से कूएँ से पानी लाकर देते थे और स्त्रियाँ भोजन बनाती थी । कितनी भी एक दूसरे से मनमुटाव हो , गाँव के सभी लोग एक ही पेड़ के नीचे इक्कट्ठे होकर अपना अपना चूल्हा बनाकर भोजन पकाते थे । आपसी मेल जोल , सौहार्द्र , प्रेम इत्यादि की वृद्धि होती थी ।
सुबह सुबह आँवला के वृक्ष का पूजन होता था । लोग आँवला की लकड़ी का ही दातौन करते थे । आँवला के वृक्ष की छाया के नीचे ही थाली में भोजन किया जाता था । यह मान्यता थी कि थाली में अगर आँवला के पत्ते गिरें , तो उसको भोजन के साथ खाने वाला व्यक्ति पूरे वर्ष बीमारी या किसी भी व्याधि से पीड़ित नहीं होगा और स्वस्थ्य बनेगा । इसके बाद सब बहुत सारा कच्चा आँवला खाते थे ।
देखिये कितनी वैज्ञानिक , पावन और धार्मिक परंपरा थी । पर आज आधुनिकता ने इन सबको लील लिया है । हमारे शास्त्रों में स्वास्थ्य के रक्षण के हित बहुत से व्रत, नियम , तपश्चर्या, विधि , निषेध , भक्ष्य , अभक्ष्य इत्यादि के माध्यम से बहुत शरीर स्वास्थयार्थ कई बातों का निरूपण किया गया है ।
उनको भगवान धर्म इत्यादि से डरा धमका कर इसलिए जोड़ दिया गया है कि हम लोग डर से भय से प्यार से तकरार से किसी भी विधा इनका पालन कर अपना आत्मिक , मानसिक , शारीरिक , आर्थिक विकास का अनुपालन कर सकें । हमारे घर में तो आँवला पूरे मौसम भर चलता है । हर हफ्ते धड़ी भर भर कर आंवला आता है और कच्चे फल की तरह खाया जाता है ।
आंवला स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभदायक है।कहा गया है जिसने भी पूरे कार्तिक मास आंवला के वृक्ष पर चढ़कर आंवला के फल पत्तियों और उसके डंठल से दातुन करके व्रत करता है ,वह आजीवन निरोगी रहता है । कहने का तात्पर्य यह है कि पूरे कार्तिक मास में आँवला के पत्र , पुष्प , फल , इत्यादि का जो भी सेवन करेगा उसके अंदर ग़ज़ब की antibodies का निर्माण होगा , शरीर से विजातीय तत्व या हानिकारक अवयव या बीमार करने वाले तत्व बाहर निकल जाएंगे ।
आँवला antioxidant का काम करता है । त्वचा के लिए बहुत उपयोगी । जल्दी वृद्धावस्था आने नहीं देता । हड्डियों के osteoporosis वाली बीमारी खत्म कर हड्डियों की मजबूती वरदान करता है ।
Antidepressant का कार्य करता है । किसी को depression हो तो वह नियमित आँवला का सेवन करे तो उसको डिप्रेशन नहीं होगा । यह ऐसा हॉर्मोन्स की secretion को induce करता है जो anti depression का कार्य करता है । आँखों के लिए , लिवर के लिए , किडनी के लिए बेहद अचूक है । आंवला का कसैलापन शरीर के लिए बहुत उपयोगी है ।
प्रजनन क्षमता को बढ़ाता है । sperms counts को बढ़ाता है और youthfullness बरकरार रखता है ।जो आँवला का सेवन नियमित करता है वह हमेशा जवान बना रहता है । इसीलिए इस दिन आँवला के वृक्ष की महिमा का प्रतिष्ठापित करने के लिए इसकी पूजा की जाती है और इसीलिए इस दिन को "आरोग्य नवमी" भी कहा जाता है ।
च्यवन ऋषि का च्यवनप्राश इसी आँवला पर ही बना है । च्यवन ऋषि ने अपनी तरुणाई या जवानी इसी आँवला के सेवन से ही प्राप्त की । इसीलिए सब लोग आज के दिन आँवला अवश्य खाईये और doctors दवाईयों और हॉस्पिटल्स से दूरी बनाईये !
- Shwetabh Pathak ( श्वेताभ पाठक )