भारत का गौरवशाली इतिहास - 63 - जहां भगवान को सबसे पहले चढ़ता है मोची के घर का भोग !
भारत का गौरवशाली इतिहास - 63
जहां भगवान को सबसे पहले चढ़ता है मोची के घर का भोग !
मेड़ता.. वो शहर जहां का कण कण अपनी बाई जी लाल सा ( राजकुमारी ) भक्त शिरोमणी मीराबाई व अपने राजा, वीर योद्धा राव जयमल की कहानी बड़े चाव से सुनाता है । उस शहर की एक मुख्य विशेषता है जिसके बारे में संभवतः बहुत कम लोग जानते हैं … लेकिन बादलों के छा जाने से सूरज कब छिपा है जो ये लोग हमारी परम्पराओं को छिपा पाएँगे ।
इतिहास में लिखा है की मेड़ता के महान शासक राव दूदा जी के दरबार में मेड़ता के रामधन जी जीनगर एक दुविधा लेकर पहुँचे … दुविधा यह की रोज़ उनकी गाय एक स्थान पर जाकर खड़ी होती है और वहाँ दूध की धारा अपने आप बहने लगती है । राव दूदा को रामधन जी की बात पर विश्वास नहीं हुआ तो वे यह दृश्य देखने स्वयं पधार गए ।
मान्यता है कि जब उन्होंने देखा की रामधन जी की बात सच है तो उन्होंने आदेश दिए की उस स्थान पर तुरंत खुदाई करवाई जाए । खुदाई होने पर वहाँ भगवान विष्णु की एक चार हाथों की काले पत्थर की मूर्ति निकली । राव दूदा जी ने तुरंत वहाँ एक चबूतरा बनवाकर उक्त विग्रह को स्थापित किया एवं श्री चारभुजा नाथ के नाम से उनकी आराधना की व नियमित राजसी पूजन का आदेश दिया । साथ ही उन्होंने आदेश दिया की ठाकुर जी ने पहला दूध का भोग रामधन की गाय से स्वीकार किया है इसलिए आज से सदैव ठाकुर जी को पहला भोग रामधन और उनके वंशजो के घर से बनकर आया हुआ प्रसाद ही चढ़ेगा ….
सैकड़ों साल बाद आज भी यह क्रम जारी है । आज भी चारभुजा नाथ के दर्शन करने आने वाले हज़ारों भक्त अपने हाथ में प्रसाद लिए प्रतीक्षा करते हैं की कब मोची परिवार का भोग ठाकुर जी को चढ़े और फिर हमें भी ठाकुर जी के दर्शन हों ।
एक मान्यता यह भी है है की मेड़ता के शासक राव जयमल जी अकबर की सेना से चित्तौड़ के क़िले की रक्षा करते हुए पैर में गोली लगने से घायल हो गए थे तो उनके भतीजे वीर कल्ला जी ने उन्हें अपने कंधों पर बैठा लिया ताकि जयमल जी रण में वीरगति प्राप्त करने की अपनी इच्छा पूरी कर सकें… यह दृश्य देखकर अकबर तक के मुँह से निकल गया “ऐसा लग रहा है जैसे हिंदुओं का चारभुजा नाथ खुद लड़ने आ गया हो”