भारत का गौरवशाली इतिहास --59 - सरदार बल्लभ भाई पटेल

भारत का गौरवशाली इतिहास --59

भारत की एकता और अखंडता के प्रतीक, आधुनिक भारत के शिल्पकार, महान स्वतंत्रता सेनानी व भारत रत्न, लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल जी की जयंती पर कोटि-कोटि नमन। पटेल के ५ गुण |

*१. सामान्य  परिवार* -- सरदार बल्लभ भाई पटेल मन और प्रकृति से किसान थे। इसके बावजूद उन्होंने उच्च शिक्षा प्राप्त की और एक सफल वकील बने। अपने समकालीन नेताओं जवाहर लाल नेहरू और महात्मा गांधी की तरह उनका जन्म किसी धनी परिवार में नहीं, बल्कि एक किसान परिवार में हुआ था। 

*२. राष्ट्र सबसे पहले* ---महात्मा गांधी के पंडित जवाहर लाल नेहरू के प्रति लगाव के बावजूद किसी भी कांग्रेस कमिटी ने 1946 में नेहरू का नाम प्रस्तावित नहीं किया। दूसरी ओर सरदार पटेल का नाम पूरे बहुमत के साथ प्रस्तावित किया गया। नेहरू ने साफ कर दिया कि वह किसी के मातहत काम नहीं करेंगे। गांधी जी को लगा कि कहीं नेहरू कांग्रेस को तोड़ न दें इससे अंग्रेजों को भारत को आजाद न करने का बहाना मिल सकता है। सरदार पटेल के मन में गांधी जी के लिए बेहद इज्जत थी, इसलिए उन्होंने अपना नामांकन वापस ले लिया। 

*३. एक सच्चे मित्र* -- जब 1930 के दशक में गुजरात में प्लेग फैला तो पटेल लोगों की सलाह को दरकिनार करते हुए अपने पीड़ित मित्र की देखभाल के लिए पहुंच गए। परिणामस्वरूप उन्हें भी इस बीमारी ने जकड़ लिया। जब तक वह ठीक नहीं हो गए वह एक पुराने मंदिर में अकेले रहे। 

*४. दूरदृष्टि*-- पटेल ने नवंबर 1950 में पंडित नेहरू को पत्र लिखकर भारत के उत्तर में चीन के संभावित खतरे के बारे में आगाह किया था। दुर्भाग्य से पंडित नेहरू ने इस ओर ज्यादा ध्यान नहीं दिया और अंत में 1962 की चीन की लड़ाई के बारे में हम जानते ही हैं। 

*५ .कर्त्तव्य परायण* -- पटेल की धर्मपत्नी का हॉस्पिटल में एक ऑपरेशन के दौरान देहांत हो गया। जब पटेल को यह समाचार दिया गया, तब वह अदालत में जिरह कर रहे थे। खबर पर प्रतिक्रिया देने के बजाए उन्होंने अपना काम जारी रखा। अदालत की कार्यवाही समाप्त होने के बाद ही उन्होंने अन्य लोगों को यह खबर बताई।

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