भारत का गौरवशाली इतिहास - 57आजाद हिंद सरकार की स्थापना दिवस

भारत का गौरवशाली इतिहास - 57आजाद हिंद सरकार की स्थापना दिवस 

आजाद हिंद सरकार की स्थापना दिवस पर शुभकामनाएं--- आज़ाद हिंद फौज ने 21 अक्टूबर 1943 को प्रथम सरकार की स्थापना  सिंगापुर में हुई और. भारत के उत्तर पूर्व के कई भागों को स्वतंत्र कर लिया गया और 11 देशों ने उसे मान्यता दी जैसे जापान, फिलीपीन्स, कोरिया, चीन, इटली, मान्चुको और आयरलैंड ने मान्यता दे दी।  और कई देशों ने अपने दूतावास भी खोले थे । भारत के वर्तमान प्रधान मंत्री आज तिरंगा लाल किले में फहराया जाएगा । लालकिले में  एक संग्रहालय भी बनाया जा रहा है जिसमे 1857 में भारत की स्वतंत्रता के प्रथम संग्राम से जुड़ी वस्तुओं को प्रदर्शित किया जाएगा 
           पिछले वर्ष 21 अक्टूबर को आज़ाद हिंद फौज के 75 वर्ष मनाना कोई सामान्य बात नहीं है। लाल किले पर तिरंगा फहराकर श्री नरेन्द्र मोदी ने जो किया, इसे करने में देश 75 साल देरी कर गया और इस बीच 12 प्रधानमंत्री यह बिना किये सिधार या पधार गए। जिन कांग्रेसी - कामरेड गठजोड ने नेता जी सुभाष को 'तोज़ो का कुत्ता' कभी कहा था, उनके वैचारिक कुनबे के मुंह पर यह करारा थप्पड़ है।
           सुभाष बोस 1938 में राष्टीय कांग्रेस के अध्यक्ष चुने गए, 1939 में बीमार होने पर स्ट्रेचर पर लाये गए और फिर भी अध्यक्ष चुने गए, लेकिन उन्हें जिन लोगों ने उन्हें ज़लील कर त्यागपत्र देने को मजबूर किया, उस दुष्ट मंडली के वंशजों को सदा के लिए त्यागपत्र थमाने का आज दिन है।
           आज याद करवा दें, जिस नेताजी पर श्याम बेनेगल ने फ़िल्म बनाई थी The Forgotten Hero, उस भूले-बिसरे हीरो को याद कराने का त्योहार है आज! लगे हाथ बताते चले कि नेता जी पर सात फिल्में और दर्जनों डॉक्यूमेंटरी बनाई गई थी। क्या ये फेसबुक-व्हाट्सअप की नई पीढ़ी जानती है?  उसे याद कराना है। आज इंग्लैंड के प्रधानमंत्री क्लेमेन्ट एटली के वो शब्द याद करने का दिनहै कि "हमारे चुपचाप जल्दी भारत छोड़ने का कारण गांधी जी के आंदोलन नहीं, बल्कि सुभाष बोस के विदा होने के बाद भी उनकी प्रेरणा से चलने वाले सैनिक  और जलसेना के विद्रोह थे।" सोचिए आज़ादी किसने दिलवाई!
              नेता जी का आज लालकिले पर स्मरण करना उस दुष्प्रचार की धज्जियां उड़ाता है कि 'आजादी बिना खड़ग बिना धार' मिली। बल्कि दीपक जतोई का शाखा वाला गीत भी आज दोहराना है "अमर शहीदां ने सिर देके, बन्निया मुढ कहानी दा, आज़ादी है असल नतीजा वीरां दी कुर्बानी दा।" बेशक गांधी जी के योगदान को भुलाया नहीं जा सकता परंतु हज़ारो क्रांतिकारियों को नजरअंदाज करने का पाप, जो अब तक सरकारों से होता रहा, उसके पश्चाताप का भी आज मौका है। 
             इस देश का असली सत्य है कि हमारे "हाथ मे माला भी है, खंडा भी है, रूह में नानक भी है, बंदा भी है।" सभी देवी देवताओं के हाथ मे शस्त्र भी, शास्त्र भी दोनों रहते है। सुभाष बोस उसी परम्परा के प्रतीक हैं। आओ एक बार बोलें "सुभाष बोस अमर रहे, अमर रहे, अमर रहे। 

साभार - श्री कश्मीरी लाल जी - राष्ट्रीय संगठक स्वादेशी जागरण मंच

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