भारत का गौरवशाली इतिहास -- 56 - शरदपूर्णिमा का वैज्ञानिक महत्व --
भारत का गौरवशाली इतिहास -- 56
शरद पूर्णिमा का वैज्ञानिक महत्व ---- आप जानते होंगे की शरद ऋतु के प्रारम्भ में दिन थोड़े गर्म और रातें शीतल हो जाया करती हैं I और इस समय अस्थमा और एलर्जी (पित्त दोष के जागृत होने हे या लीवर डिसऑर्डर होने से ) बढ़ती है !आयुर्वेद के अनुसार यह पित्त दोष के प्रकोप का काल माना जाता है और #मधुर + #तिक्त_कषाय रस पित्त दोष का शमन करते हैं। आपने शरद पूर्णिमा की रात अक्सर खीर बनाने के महत्व को सुना होगा। इस खीर में निम्न जड़ी बूटी मिला कर खाने से ये अमृत के समान हो जाता है और पित्त दोष का समन करता है
*शरद पूर्णिमा को देसी गाय के दूध में दशमूलक्वाथ, सौंठ, कालीमिर्च, वासा, अर्जुन की छाल चूर्ण, तालिश पत्र चूर्ण, वंशलोचन, बड़ीइलायची, पिप्पली इन सबको आवश्यक मात्रा में मिश्री मिलाकर पकायें और खीर बना लेंI खीर का महत्त्व इसलिए हे क्यों की इसमें #गायकेदूध को पकाने से दूध का # लेक्टिकएसिड और इसमें मौजूद # कोलेस्ट्रीयम नामक तत्व होता है! जो अमृत समान होता है जो ईम्युनिटी को बढ़ाता है और ये चाँद की रौशनी में इस तत्व की तासीर बढ़ जाती है यह कोलेस्ट्रम सिर्फ गाय के दूध या महिला जो प्रसवकाल में हो उसके दूध में पाया जाता है भैंस या बकरी के दूध में नही!*
खीर में ऊपर से शहद और तुलसी पत्र मिला दें ,अब इस खीर को ताम्बे के साफ़ बर्तन में रात भर पूर्णिमा की चांदनी रात में खुले आसमान के नीचे ऊपर से जालीनुमा ढक्कन से ढक कर छोड़ दें । और अपने घर की छत पर बैठ कर चंद्रमा को अर्घ्य देकर, अब इस खीर को रात्रि जागरण कर रहे दमे के रोगी को प्रातः काल ब्रह्म मुहूर्त (4-6 बजे प्रातः) सेवन कराएं I इससे रोगी को सांस और कफ दोष के कारण होने वाली तकलीफों में काफी लाभ मिलता है I
रात्रि जागरण के महत्व के कारण ही इसे जागृति पूर्णिमा भी कहा जाता है ,इसका एक कारण रात्रि में स्वाभाविक कफ के प्रकोप को जागरण से कम करना हैI इस खीर को मधुमेह से पीड़ित रोगी भी ले सकते हैं, बस इसमें मिश्री की जगह प्राकृतिक स्वीटनर स्टीविया की पत्तियों को मिला दें Iउक्त खीर को स्वस्थ व्यक्ति भी सेवन कर सकते हैं ,बल्कि इस पूरे महीने मात्रा अनुसार सेवन करने साइनोसाईटीस जैसे उर्ध्वजत्रुगत (ई.एन.टी.) से सम्बंधित समस्याओं में भी लाभ मिलता है I
*कई आयुर्वेदिक चिकित्सक शरद पूर्णिमा की रात दमे के रोगियों को रात्रि जागरण के साथ कर्णवेधन भी करते हैं ,जो वैज्ञानिक रूप सांस के अवरोध को दूर करता है I तो बस शरद पूर्णिमा को पूनम की चांदनी का सेहत के परिप्रेक्ष्य में पूरा लाभ उठाएं बस ध्यान रहे दिन में सोने को अपथ्य माना गया है।*