भारत का गौरवशाली इतिहास - 53 - नवरात्र पर्व और कन्या पूजन का महत्व-
भारत का गौरवशाली इतिहास - 53
नवरात्र पर्व और कन्या पूजन का महत्व-- कुछ लोग नवमी के दिन भी कन्यापूजन करते हैं लेकिन अष्टमी के दिन कन्यापूजन करना श्रेष्ठ रहता है। कन्याओं की संख्या 9 हो तो अति उत्तम है। शास्त्रों में बताया गया है की जिस दिन सूर्योदय के समय आश्विन शुक्ल अष्टमी तिथि हो उस दिन श्रीदुर्गाष्टमी और महाष्टमी का व्रत पूजन किया जाना चाहिए। मान्यता है कि दो से दस वर्ष तक की कन्या देवी के शक्ति स्वरूप की प्रतीक होती हैं. कन्याओं की आयु 2 वर्ष से ऊपर तथा 10 वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिए।
अथ महाष्टमीघटिकामात्राप्यौवयिकी नवमी युता ग्राह्या
सप्तमी स्वल्पयुता सर्वथा त्याज्या।।
यदा तु पूर्वत्र सप्तमीयुता परत्रोदये नास्ति घटिका
न्यूना वा वर्तते तदा पूर्वा सप्तमीविद्धापि ग्राह्या।।
*इनको नमस्कार करने के मंत्र निम्नलिखित हैं*
*1. कौमाटर्यै नम: --* दो वर्ष की कन्या कुमारी - इसके पूजन से दुख और दरिद्रता समाप्त हो जाती है।
*2. त्रिमूर्त्यै नम: --* तीन वर्ष की कन्या त्रिमूर्ति -- त्रिमूर्ति के पूजन से धन-धान्य का आगमन और संपूर्ण परिवार का कल्याण होता है।
*3. कल्याण्यै नम: --* चार वर्ष की कन्या कल्याणी,-- कल्याणी की पूजा से सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।
*4. रोहिर्ण्य नम: --* पांच वर्ष की कन्या रोहिणी -- रोहिणी के पूजन से व्यक्ति रोग-मुक्त होता है।
*5. कालिकायै नम: --* छह वर्ष की कन्या कालिका - कालिका की अर्चना से विद्या, विजय, राजयोग की प्राप्ति होती है।
*6. चण्डिकार्य नम: --* सात वर्ष की चंडिका-- कन्या चण्डिका के पूजन से ऐश्वर्य मिलता है।
*7. शम्भव्यै नम: --* आठ वर्ष की कन्या शांभवी -- शाम्भवी की पूजा से वाद-विवाद में विजय होती है।
*8. दुर्गायै नम: --* नौ वर्ष की कन्या दुर्गा - किसी कठिन कार्य को सिद्धि करने तथा दुष्ट का दमन करने के उद्देश्य से दुर्गा की पूजा की जाती है।
*9. सुभद्रायै नम:--* दस वर्ष की कन्या सुभद्रा मानी जाती है -- इनकी पूजा से लोक-परलोक दोनों में सुख प्राप्त होता है।
*श्री दुर्गा अष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएं। मां आपके परिवार में सुख शान्ति व समृद्धि प्रदान करें।*