भारत में प्लास्टिक प्रदूषण की समस्या एवं उसका समाधान -1
भारत में प्लास्टिक प्रदूषण की समस्या एवं उसका समाधान -1
74वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारत को प्लास्टिक प्रदूषण से मुक्त करने की आवश्यकता पर बल दिया है। उन्होंने देश की जनता और खासतौर पर दुकानदारों-व्यापारियों से इस दिशा में योगदान देने की अपील की है। उल्लेखनीय है कि देश को प्लास्टिक कचरे से मुक्त करने के अभियान की शुरूआत सरकार द्वारा राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती (02 अक्टूबर) के अवसर पर की जाएगी। यह अभियान ‘स्वच्छ भारत’ की सफलता से प्रेरित होकर सरकार द्वारा शुरू किया जा रहा है।
प्लास्टिक एक ऐसा पदार्थ होता है जिसे विभिन्न आकारों में ढाला जा सकता है। प्लास्टिक शब्द यूनानी ‘प्लैतिकोस’ से बना है जिसका अर्थ है किसी भी आकार में ढाल देना। प्लास्टिक को अच्छा प्रतिरोधी माना जाता है क्योंकि बिजली का इस पर कोई प्रभाव नहीं होता है और ये पॉलीमर से बने होते हैं। लेकिन आज प्लास्टिक पूरी दुनिया के लिए एक विकट समस्या बन चुका है। प्लास्टिक प्रदूषण कितना खतरनाक है, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि प्लास्टिक सालों-साल मिट्टी में दबे रहने के बावजूद मिट्टी का हिस्सा नहीं बन पाते, साथ ही यह पानी को जमीन के अंदर जाने से भी रोक देते हैं। जिस रूप में आज हम प्लास्टिक का इस्तेमाल कर रहे हैं, इसकी खोज 27 मार्च, 1933 को अनजाने में हुई थी। दो ब्रिटिश वैज्ञानिकों एरिक फॉसेट और रेजिनाल्ड गिब्सन इंपीरियल केमिकल इंडस्ट्रीज में इथीलिन पर प्रयोग कर रहे थे। तभी इथीलिन में ऑक्सीजन के अणु मिल जाने से रातों-रात पॉलिथीन बन गया। दो वर्ष बाद उन्होंने प्लास्टिक बनाने के अन्य तरीकों को भी विकसित किया।
अंतर्राष्ट्रीय गैरसरकारी संगठन वर्ल्ड वाइड फंड द्वारा हाल ही में जारी रिपोर्ट के मुताबिक 2030 तक प्लास्टिक प्रदूषण दोगुना हो जाएगा। वैज्ञानिकों के अनुसार समुद्र में 1950 से 2016 के बीच के 66 वर्षों में जितना प्लास्टिक जमा हुआ है, उतना अगले केवल एक दशक में जमा हो जाएगा। इससे महासागरों में प्लास्टिक कचरा 30 करोड़ टन तक पहुँच सकता है। गौरतलब है कि हर साल उत्पादित होने वाले कुल प्लास्टिक में से महज 20 फीसद ही रिसाइकिल हो पाता है। 39 फीसद जमीन के अंदर दबाकर नष्ट किया जाता है और 15 फीसद जला दिया जाता है। प्लास्टिक के जलने से उत्सर्जित होने वाली कार्बन डाइऑक्साइड की मात्र 2030 तक तिगुनी हो जाएगी, जिससे ”क्षय रोग के मामले में तेजी से वृद्धि होने की आशंका है। क्रमशः
*पॉलीथिन को कचरे में न फेंके!*
*उसको *Ecobricks बनाएं! अपने शहर को स्वच्छ बनाये!*
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