भारत का गौरवशाली इतिहास - 34
*भारत का गौरवशाली इतिहास - 34*
*भगवान श्रीराम का एक रूप - कुशल संगठक -* संगठन को दक्षता से चलाने के लिए , सही व्यक्ति का सही स्थान पर नियुक्त किया जाना अति आवश्यक है । व्यक्ति की क्षमताओं को पहचान कर उसके अनुसार उसको काम पर लगाना , एक कुशल प्रबंधक का ही गुण है । भगवान श्रीराम जी के जीवन के ऐसे बहुत सारे प्रसंग हैं , जिनमें उनका यही गुण परिलक्षित होता है ।
जब माता सीता जी की खोज में वानरों की विभिन्न टुकडियों को विभिन्न दिशाओं में भेजा गया तब उन्होनें श्री हनुमान जी को यह कार्य दिया , सौ योजन का समुद्र पार कर लंका तक पहुंचना जब चुनौती बनकर खडा हो गया , तब विश्वकर्मा जी के पुत्र नल का कौशल जानकर श्रीराम जी ने वानरों की सहायता से समुद्र पार सेतु - निर्माण का आदेश दिया , युद्ध से पूर्व राजधर्म का पालन करते हुए अंगद के गुणों को पहचान कर भगवान ने उसे राजदूत के कार्य के लिए चुना ।
*भगवान श्रीराम जी में कुशल प्रबंधक के सभी गुण मौजूद थे - दूसरों का उत्साहवर्धन करना , संकट के समय कुटनीति का प्रयोग , दूरदर्शिता , साहस , धैर्य , विनम्रता आदि । इन सब गुणों से परिपूर्ण होने के कारण ही प्रभु श्रीराम जी कुशल प्रबंधक के रुप में भी हमारे आदर्श हैं । हम भी इन गुणों को अपने जीवन में उतार कर अपने संगठन , अपने जीवन को नयी उंचाईयों तक ले जा सकते हैं ।*