भारत का गौरवशाली इतिहास - 25

भारत का गौरवशाली इतिहास - 25

*शिक्षक दिवस पर विशेष --*  भारत की महान 
शिक्षक परम्परा में शिक्षक बनना सबसे 
बड़ा उत्तरदायित्व हैं, क्योंकि एक शिक्षक वह 
दिशासूचक है जो जिज्ञासा, ज्ञान और 
बुद्धिमानी के चुम्बक को सक्रिय बनाता है।     
                   
👌शिक्षक की गोद में उत्थान पलता है।
सारा जहां शिक्षक के पीछे ही चलता है।
👌शिक्षक का बोया हुआ पेड़ बनता है।
वही पेड़ हजारों बीज जनता है।
👌शिक्षक काल की गति को मोड़ सकता है।
शिक्षक धरा से अम्बर को जोड़ सकता है।
👌शिक्षक की महिमा महान होती है।
शिक्षक बिन अधूरी हूँ वसुन्धरा कहती है।
👌याद रखो चाणक्य ने इतिहास बना डाला था।
क्रूर मगध राजा को मिट्टी में मिला डाला था।
👌बालक चन्द्रगुप्त को चक्रवर्ती सम्राट बनाया था।
एक शिक्षक ने अपना लोहा मनवाया था।
👌संदीपनी से गुरु सदियों से होते आये है।
कृष्ण जैसे नन्हें-नन्हें बीज बोते आये है।
👌शिक्षक से ही अर्जुन और युधिष्ठिर जैसे नाम है।
शिक्षक की निंदा करने से दुर्योधन बदनाम है।
👌शिक्षक की ही दया दृष्टि से बालक राम बन जाते है।
शिक्षक की अनदेखी से वे रावण भी कहलाते है।
👌हम सब ने भी शिक्षक बनने का सुअवसर पाया है।
बहुत बड़ी ज़िम्मेदारी को हमने गले लगाया है।
👌आओ हम संकल्प करे की अपना फ़र्ज निभायेंगे।
अपने प्यारे भारत को हम जगतगुरु बनायेंगे।
👌अपने शिक्षक होने का हरपल सम्मान करेंगे।
इस समाज में हम भी अपना शिक्षा-दान करेंगे।
 
💐 *सम्पूर्ण शिक्षक-वर्ग को समर्पित*

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