भारत का गौरवशाली इतिहास - 12

*भारत का गौरवशाली इतिहास - 12*

- जीवन के लिए अति महत्वपूर्ण पर्यावरण की सुरक्षा के लिए हमारे पूर्वजों द्वारा करणीय कार्यो की जानकारी हमें पुराणों व धर्मग्रंथों में पढ़ने को मिलती है !!

 स्कंद पुराण में एक सुंदर श्लोक है -
*अश्वत्थमेकम् पिचुमन्दमेकम् न्यग्रोधमेकम्  दश चिञ्चिणीकान्।*
*कपित्थबिल्वाऽऽमलकत्रयञ्च पञ्चाऽऽम्रमुप्त्वा नरकन्न पश्येत्।।*
- अश्वत्थः = पीपल (100% कार्बन डाइऑक्साइड सोखता है)
पिचुमन्दः = नीम (80% कार्बन डाइऑक्साइड सोखता है)
न्यग्रोधः = वटवृक्ष(80% कार्बन डाइऑक्साइड सोखता है)
चिञ्चिणी = इमली (80% कार्बन डाइऑक्साइड सोखता है)
कपित्थः = कविट (80% कार्बन डाइऑक्साइड सोखता है)
बिल्वः = बेल (85% कार्बन डाइऑक्साइड सोखता है)
आमलकः = आँवला (74% कार्बन डाइऑक्साइड सोखता है)
आम्रः = आम (70% कार्बन डाइऑक्साइड सोखता है)
(उप्ति = पौधा लगाना)
*अर्थात्- जो कोई इन वृक्षों के पौधों का रोपण करेगा, उनकी देखभाल करेगा उसे नरक के दर्शन नही करने पड़ेंगे।*

शास्त्रों में पीपल को वृक्षों का राजा कहा गया है।
*मूले ब्रह्मा त्वचा विष्णु शाखा शंकरमेवच।* 
*पत्रे पत्रे सर्वदेवायाम् वृक्ष राज्ञो नमोस्तुते।।*
भावार्थ-जिस वृक्ष की जड़ में ब्रह्मा जी तने पर श्री हरि विष्णु जी एवं शाखाओं पर देव आदि देव महादेव भगवान शंकर जी का निवास है और उस वृक्ष के पत्ते पत्ते पर सभी देवताओं का वास है ऐसे वृक्षों के राजा पीपल को नमस्कार है।।🙏

👉दस कुॅंओं के बराबर एक बावड़ी, दस बावड़ियों के बराबर एक तालाब, दस तालाब के बराबर एक पुत्र एवं  दस पुत्रों के बराबर एक वृक्ष है। 
*जीवन में लगाए गए वृक्ष अगले जन्म में संतान के रूप में प्राप्त होते हैं। (विष्णु धर्मसूत्र 19/4)*
👉 जो व्यक्ति पीपल अथवा नीम अथवा बरगद का एक, चिंचिड़ी(इमली) के दस कपित्थ अथवा बिल्व अथवा ऑंवले के तीन और आम के पांच पेड़ लगाता है।
वह *सब पापों से मुक्त हो जाता है। ( भविष्य पुराण)*
👉 पौधारोपण करने वाले व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है।
👉 शास्त्रों के अनुसार पीपल का पेड़ लगाने से संतान लाभ होता है।
👉 अशोक वृक्ष लगाने से शोक नहीं होता है।
👉 पाकड़ का वृक्ष लगाने से उत्तम ज्ञान प्राप्त होता है।
👉 बिल्वपत्र का वृक्ष लगाने से व्यक्ति दीर्घायु होता है।
👉 वट वृक्ष लगाने से मोक्ष मिलता है।
👉 आम वृक्ष लगाने से कामना सिद्ध होती है।
👉 कदम्ब का वृक्षारोपण करने से विपुल लक्ष्मी की प्राप्त होती है।
👉 प्राचीन भारतीय चिकित्सा- पद्धति के अनुसार पृथ्वी पर ऐसी कोई भी वनस्पति नहीं है, जो औषधि ना हो।

इसलिए आगामी वर्षों में प्रत्येक 500 मीटर के अंतर पर यदि एक एक पीपल, बड़ , नीम आदि का वृक्षारोपण किया जाएगा, तभी अपना भारत देश प्रदूषणमुक्त होगा। हम अपने संगठित प्रयासों से ही अपने "भारत" को नैसर्गिक आपदा से बचा सकते है। भविष्य में भरपूर मात्रा में नैसर्गिक ऑक्सीजन मिले इसके लिए आज से ही अभियान आरंभ करने की आवश्यकता है।आइए हम पीपल, बड़, बेल, नीम, आंवला एवं आम आदि वृक्षों को लगाकर आने वाली पीढ़ी को निरोगी एवं "सुजलां सुफलां पर्यावरण"  देने का प्रयत्न करें। #Hariawalpunjab
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